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Thursday, January 11, 2018

RTI गर्ल ऐश्वर्या पाराशर की गोमती से गंगा को मिलाने की मांग : परियोजना बनाने को UP CM योगी को लिखा पत्र l



Lucknow/11-01-2018…………समाचार लेखिका - उर्वशी शर्मा  ( स्वतंत्र पत्रकार )...........Exclusive News by YAISHWARYAJ ©yaishwaryaj
हिन्दू आस्था के जीवित कारकों में गंगा का स्थान सर्वोपरि है l आबादी के हिसाब से देश का सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश से होकर जो नदियाँ बहती हैं उनमें गंगा के साथ-साथ गोमती भी एक प्रमुख नदी है l राजधानी लखनऊ के सिटी मोंटेसरी स्कूल की राजाजीपुरम शाखा की कक्षा 11 की जीव विज्ञान की 15 वर्षीय छात्रा और देश भर में आरटीआई गर्ल के नाम से जानी जाने वाली ऐश्वर्या पाराशर ने हिन्दू आस्था का वास्ता देते हुए आज सूबे के सीएम योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर गोमती नदी के उद्गम के आस-पास गंगा नदी की एक धार को मिलाने के लिए ‘गंगा गोमती लिंक परियोजना शुरू करने की मांग उठा दी है l

बताते चलें कि 8 साल की नन्हीं सी उम्र से आरटीआई के सफल प्रयोग करने के चलते ही ऐश्वर्या देश भर में आरटीआई गर्ल के नाम से जानी जाती हैं l देश को सूखे और बाढ़ से निजात दिलाने के लिए नदी जोड़ो योजना के विचार को सरकारी रूप से पहचान देने वाले पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई और इस योजना के लिए केंद्र की वर्तमान नरेंद्र मोदी सरकार  द्वारा 5 लाख करोड़ रुपयों का प्राविधान करने की बात अपने पत्र में कहते हुए ऐश्वर्या ने योगी से गुहार लगाई है कि वे मध्य प्रदेश सरकार की ‘नर्मदा क्षिप्रा सिंहस्थ लिंक परियोजना’ की तर्ज पर ‘गंगा गोमती लिंक परियोजना’ बनाकर गोमती नदी के उद्गम यूपी के माधो टांडा स्थित गोमत ताल के आस-पास गंगा नदी की एक धार को गोमती से  मिलाने के लिए काम शुरू करें l

आरटीआई के माध्यम से पर्यावरण से जुड़े मुद्दे प्रमुखता से उठाने वाली 15 वर्षीय इस जागरूक छात्रा ने अपने पत्र में योगी को हिन्दू आस्था का वास्ता देते हुए लिखा है कि यदि योगी गंगा को गोमती से मिला देते हैं तो गोमती किनारे बसे लखीमपुर खीरी,सीतापुर,हरदोई,लखनऊ,सुल्तानपुर,जौनपुर आदि जिलों के करोड़ों लोग गंगा नदी के दर्शन अपने जिले में ही कर अपने धार्मिक क्रियाकलापों के लिए सुदूर जिलों तक आने-जाने की जद्दोजहत से बच सकेंगे l

बायो टेक्नोलॉजी में विशेष रूचि रखने वाली ऐश्वर्या पाराशर ने बताया कि उन्हें विश्वास है कि उसके योगी अंकल उसके प्रपोजल पर कार्यवाही करके केंद्र सरकार से बात करके प्रदेशवासियों को ‘गंगा गोमती लिंक परियोजना’ का तोहफा अवश्य देंगे l 

News written by freelance journalist Urvashi Sharma  
Exclusive News by YAISHWARYAJ ©yaishwaryaj

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Friday, January 5, 2018

UP : सूचना आयुक्त से मिल ब्लैकमेलर,दलाल RTI कार्यकर्ताओं के नाम सार्वजनिक कराएंगी एक्टिविस्ट उर्वशी शर्मा l




लखनऊ/05-01-2018...............................उत्तर प्रदेश के राज्य सूचना आयुक्त हाफिज उस्मान ने बीते कल रामपुर के विकास भवन में जन सूचनाधिकारियों के प्रशिक्षण कार्यक्रम में बयान दिया था कि अधिकांश आरटीआई कार्यकर्ता आरटीआई  के नाम पर दलाली और ब्लैकमेलिंग करते हैं। इस बात को सच बताने के लिए उस्मान ने रामपुर के एक मामला का हवाला भी दिया था हालाँकि उस्मान ने कथित ब्लैकमेलर कार्यकर्ता का नाम सार्वजनिक नहीं किया था । कथित ब्लैकमेलर कार्यकर्ता को कचहरी में बैठने वाला बताते हुए उस्मान ने कार्यकर्ता के उनके सामने रो देने के बाद बिना ऍफ़.आई.आर. लिखाये मामला रफा-दफा कर देने की बात कहते हुए ऐसे और भी कई मामले होने की बात सार्वजनिक रूप से कही थी। उस्मान ने यह भी कहा था कि ऐसे लोगों के खिलाफ आयोग काफी सख्ती से कार्रवाई करता है। सूचना आयुक्त ने यह भी कहा था कि वे डरकर काम नहीं करते, मजबूती से काम करते हैं और उन्होंने कई बार आरटीआई कार्यकर्ताओं के खिलाफ एफआइआर भी दर्ज कराई है। उस्मान ने उत्तर प्रदेश सूचना का अधिकार नियमावली 2015 में अधिनियम का दुरुपयोग करने वालों के लिए कार्रवाई का नया  प्रावधान किये जाने की बात भी सार्वजनिक रूप से कही थी । 



सूचना आयुक्त के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए सूबे की तेजतर्रार आरटीआई कार्यकत्री उर्वशी शर्मा ने उस्मान के इस बयान को सस्ती लोकप्रियता पाने के लिए राजनैतिक मानसिकता के तहत दिया गया एक ऐसा भ्रामक बयान बताया है जो सूबे में आरटीआई आन्दोलन के लिए आत्मघाती साबित होगा l बकौल उर्वशी सूचना आयोग के वर्तमान आयुक्तों में से अच्छा काम करने वाले आयुक्तों में शुमार होने वाले हाफिज उस्मान के ऐसे आरटीआई विरोधी बयान से    वे व्यक्तिगत रूप से व्यथित हैं l उर्वशी ने बयान जारी करके कहा है कि उस्मान के वक्तव्य से उनके जैसे अनेकों सच्चे आरटीआई कार्यकर्ताओं का मनोबल कम होगा जिसकी अंतिम परिणति सूबे में पारदर्शिता और जबाबदेही की मुहिम के कमजोर होने के रूप में सामने आयेगी l 



बकौल उर्वशी कुछेक गलत लोगों की बजह से आरटीआई एक्टिविस्टों की पूरी की पूरी बिरादरी पर तोहमत लगाया जाना सही नहीं है और इसीलिये अब वे शीघ्र ही सूचना आयुक्त हाफिज उस्मान और मुख्य सूचना आयुक्त जावेद उस्मानी से मिलकर हाफिज उस्मान के भ्रामक वक्तव्य पर  स्पष्टीकरण जारी करने के साथ-सतह आरटीआई  के नाम पर दलाली और ब्लैकमेलिंग करने वाले सभी आरटीआई कार्यकर्ताओं के नाम आयोग की वेबसाइट पर और आयोग में सूचना पट पर प्रदर्शित कराने और सभी कथित ब्लैकमेलर कार्यकर्ताओं के खिलाफ तत्काल ऍफ़.आई.आर. लिखाने की मांग करेंगी l 



उर्वशी ने बताया कि RTI एक्ट का दुरुपयोग करने से लोगों को हतोत्साहित करने के लिए वे उत्तर प्रदेश सूचना का अधिकार नियमावली 2015 में अधिनियम का दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के उस्मान द्वारा बताये गए नए प्रावधान को भी आयोग में जगह-जगह लिखाए जाने और आयोग द्वरा इसका प्रचार-प्रसार करने की मांग करेंगी l

Thursday, January 4, 2018

Monday, January 1, 2018

RTI एक्टिविस्ट उर्वशी की सूचना आयोगों को Autonomy देकर संवैधानिक दर्जा देने की मांग l





लखनऊ/01 जनवरी 2018..................... लखनऊ स्थित अपंजीकृत सामाजिक संगठन येश्वर्याज की संस्थापिका और प्रबंधकीय सदस्य उर्वशी शर्मा ने आज भारत के राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू को एक प्रस्ताव भेजकर  भारत के सभी सूचना आयोगों को पूर्ण स्वायत्तता प्रदान कर संवैधानिक प्राधिकरण बनाने की मांग उठा दी है l 


बताते चलें कि ‘येश्वर्याज लखनऊ स्थित एक सामाजिक संगठन है जो विगत 17  वर्षों से अनेकों सामाजिक क्षेत्रों के साथ-साथ 'लोकजीवन में पारदर्शिता संवर्धन और जबाबदेही निर्धारण' के क्षेत्र में निरंतर कार्यरत है l


उर्वशी ने अपने पत्र में लिखा है “साल 2005 में लागू हुआ सूचना का अधिकार कानून यानि कि आरटीआई एक्ट देश के सबसे क्रांतिकारी कानूनों में एक है। इस कानून ने सरकारी सूचनाओं तक आम आदमी की पहुंच सुनिश्चित की है । कई घोटालों का खुलासा भी आरटीआई से मिली जानकारियों से हुआ है । सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 को लागू करने के पीछे के प्रमुख उद्देश्यों यथा नागरिकों तक सूचना की पंहुंच सुनिश्चित करके सरकारी कामकाजों को भ्रष्टाचार मुक्त करने आदि को प्राप्त करने में सूचना आयोगों की भूमिका सर्वोपरि है l
 

उर्वशी ने दावा किया है कि व्यवहारिक अनुभव के आधार पर संस्था का आंकलन है कि वित्तीय स्वायत्तता न होने के चलते सूचना आयोगों की कार्यप्रणाली सरकारों की ओर झुकती चली जा रही है जिसके कारण सूचना आयोग सरकारी कामकाजों को पारदर्शी और जबाबदेह बनाकर भ्रष्टाचार मुक्त रखने के अपने प्रमुख दायित्व का निर्वहन सम्यक रूप से नहीं कर पा रहे हैं l बकौल उर्वशी संस्था मानती है कि यदि सूचना आयोगों को जल्द ही सरकारों के नियंत्रण से पूर्णरूपेण मुक्त नहीं किया गया तो उनका गठन करने का भारत की संसद का उद्देश्य ही अर्थहीन हो जाएगा और इसीलिये संस्था ने देश के सभी सूचना आयोगों को भी चुनाव आयोग और कैग की तर्ज पर वित्तीय स्वायत्तता देकर संवैधानिक प्राधिकरण बनाने  और इनको सरकारों के नियंत्रण से पूर्णरूपेण  मुक्त करने की आवश्यकता बताते हुए  भारत के राष्ट्रपति,प्रधानमंत्री और उपराष्ट्रपति से अनुरोध किया है कि वे भारत के सभी सूचना आयोगों को पूर्ण स्वायत्तता प्रदान कर संवैधानिक प्राधिकरण बनाने के सम्बन्ध में संस्था द्वारा प्रेषित किये जा रहे संस्था के प्रस्ताव पर गंभीरतापूर्वक विचार करके मांग-पत्र का निस्तारण करें l मुद्दे को व्यापक जनहित से जुड़ा हुआ बताते हुए शीर्ष पदाधिकारियों से उनके व्यक्तिगत ध्यानाकर्षण और समर्थन की अपेक्षा और प्रार्थना करने की बात भी इस मांगपत्र में कही गई है l प्रस्ताव की प्रति भारत के सभी राज्यों के राज्यपालों को भी भेजे जाने की बात उर्वशी ने कही है l

उर्वशी ने बताया कि उन्हें विश्वास है कि केंद्र सरकार उनके प्रस्ताव पर कार्यवाही कर सूचना आयोगों को पूर्ण स्वायत्तता देकर उन्हें संवैधानिक निकाय बनायेगी l  


भारत के सभी सूचना आयोगों को पूर्ण स्वायत्तता प्रदान कर संवैधानिक प्राधिकरण बनाने की एक्टिविस्ट उर्वशी शर्मा की मांग l

लखनऊ/01 जनवरी 2018..................... लखनऊ स्थित अपंजीकृत सामाजिक संगठन येश्वर्याज की संस्थापिका और प्रबंधकीय सदस्य उर्वशी शर्मा ने आज भारत के राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू को एक प्रस्ताव भेजकर  भारत के सभी सूचना आयोगों को पूर्ण स्वायत्तता प्रदान कर संवैधानिक प्राधिकरण बनाने की मांग उठा दी है l 

बताते चलें कि ‘येश्वर्याज लखनऊ स्थित एक सामाजिक संगठन है जो विगत 17  वर्षों से अनेकों सामाजिक क्षेत्रों के साथ-साथ 'लोकजीवन में पारदर्शिता संवर्धन और जबाबदेही निर्धारण' के क्षेत्र में निरंतर कार्यरत है l

उर्वशी ने अपने पत्र में लिखा है “साल 2005 में लागू हुआ सूचना का अधिकार कानून यानि कि आरटीआई एक्ट देश के सबसे क्रांतिकारी कानूनों में एक है। इस कानून ने सरकारी सूचनाओं तक आम आदमी की पहुंच सुनिश्चित की है । कई घोटालों का खुलासा भी आरटीआई से मिली जानकारियों से हुआ है । सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 को लागू करने के पीछे के प्रमुख उद्देश्यों यथा नागरिकों तक सूचना की पंहुंच सुनिश्चित करके सरकारी कामकाजों को भ्रष्टाचार मुक्त करने आदि को प्राप्त करने में सूचना आयोगों की भूमिका सर्वोपरि है l

उर्वशी ने दावा किया है कि व्यवहारिक अनुभव के आधार पर संस्था का आंकलन है कि वित्तीय स्वायत्तता न होने के चलते सूचना आयोगों की कार्यप्रणाली सरकारों की ओर झुकती चली जा रही है जिसके कारण सूचना आयोग सरकारी कामकाजों को पारदर्शी और जबाबदेह बनाकर भ्रष्टाचार मुक्त रखने के अपने प्रमुख दायित्व का निर्वहन सम्यक रूप से नहीं कर पा रहे हैं l बकौल उर्वशी संस्था मानती है कि यदि सूचना आयोगों को जल्द ही सरकारों के नियंत्रण से पूर्णरूपेण मुक्त नहीं किया गया तो उनका गठन करने का भारत की संसद का उद्देश्य ही अर्थहीन हो जाएगा और इसीलिये संस्था ने देश के सभी सूचना आयोगों को भी चुनाव आयोग और कैग की तर्ज पर वित्तीय स्वायत्तता देकर संवैधानिक प्राधिकरण बनाने  और इनको सरकारों के नियंत्रण से पूर्णरूपेण  मुक्त करने की आवश्यकता बताते हुए  भारत के राष्ट्रपति,प्रधानमंत्री और उपराष्ट्रपति से अनुरोध किया है कि वे भारत के सभी सूचना आयोगों को पूर्ण स्वायत्तता प्रदान कर संवैधानिक प्राधिकरण बनाने के सम्बन्ध में संस्था द्वारा प्रेषित किये जा रहे संस्था के प्रस्ताव पर गंभीरतापूर्वक विचार करके मांग-पत्र का निस्तारण करें l मुद्दे को व्यापक जनहित से जुड़ा हुआ बताते हुए शीर्ष पदाधिकारियों से उनके व्यक्तिगत ध्यानाकर्षण और समर्थन की अपेक्षा और प्रार्थना करने की बात भी इस मांगपत्र में कही गई है l प्रस्ताव की प्रति भारत के सभी राज्यों के राज्यपालों को भी भेजे जाने की बात उर्वशी ने कही है l 


उर्वशी ने बताया कि उन्हें विश्वास है कि केंद्र सरकार उनके प्रस्ताव पर कार्यवाही कर सूचना आयोगों को पूर्ण स्वायत्तता देकर उन्हें संवैधानिक निकाय बनायेगी l  


Saturday, December 30, 2017

यूपी–जेलों में कितने किन्नर,हिन्दू,मुस्लिम,सिख,ईसाई?शासन और मुख्यालय को नहीं पता : आरटीआई खुलासा l


लखनऊ/30 दिसम्बर 2017............ समाचार लेखिका - उर्वशी शर्मा ( स्वतंत्र पत्रकार ) Exclusive News by YAISHWARYAJ ©yaishwaryaj यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव समाजवादी होने पर भी कम्प्यूटराइजेशन और संचार क्रांति के हिमायती थे l संत होने पर भी वर्तमान सीएम योगी आदित्यनाथ शासन-प्रशासन को पेपरलेस बनाने की पुरजोर हिमायत करते है l ऐसे में अगर हम आपसे कहें कि यूपी के जेल महकमे के सबसे बड़े आफिसों और हाकिमों को सूबे की जेलों में बंद कैदियों की कई अहम जानकारियाँ नहीं हैं तो क्या आप यकीन करेंगे ? शायद नहीं l पर अब सूबे की राजधानी लखनऊ के फायरब्रांड आरटीआई कंसलटेंट और इंजीनियर संजय शर्मा द्वारा दायर की गई एक आरटीआई से एक ऐसा चौंकाने वाला खुलासा हुआ है जिससे यूपी के शासन और जेल मुख्यालय की जेलों में बंद कैदियों की पूरी जानकारियां रखने के वारे में उदासीन रवैया अपनाने की बात सामने आ रही है l To view original RTI & replies, please click this exclusive web-link http://upcpri.blogspot.in/2017/12/up-70-cctv-rti.html देश के नामचीन मानवाधिकार कार्यकर्ताओं में शुमार होने वाले संजय शर्मा ने बीते 16 नवम्बर को यूपी के मुख्य सचिव के कार्यालय में एक आरटीआई दायर करके यूपी की जेलों और जेलों में बंद कैदियों के सम्बन्ध में 10 बिन्दुओं पर सूचना माँगी थी l मुख्य सचिव कार्यालय के जन सूचना अधिकारी पी. के. पाण्डेय ने बीते 30 नवम्बर को संजय की अर्जी को यूपी के कारागार विभाग को अंतरित कर दिया था l उत्तर प्रदेश शासन के कारागार प्रशासन एवं सुधार अनुभाग – 3 की अनुभाग अधिकारी और जन सूचना अधिकारी किरण कुमारी ने बीते 6 दिसम्बर को संजय की अर्जी को यूपी के कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाओं के लखनऊ स्थित मुख्यालय को अंतरित कर दिया था जहाँ के अपर महानिरीक्षक कारागार डा. शरद ने बीते 20 दिसम्बर को पत्र जारी करके संजय को जो सूचना दी है उससे सामने आ रहा है कि संचार क्रांति और कम्प्यूटराइजेशन के इस समय में भी यूपी का जेल महकमा अपनी जेलों में बंद कैदियों की कई अहम जानकारियों से अनजान है l समाजसेवी संजय शर्मा को दी गई सूचना के अनुसार यूपी के शासन और जेल मुख्यालय में यूपी की जेलों में बंद कैदियों में से किन्नर, हिन्दू,मुसलमान,सिख और ईसाई कैदियों की संख्या की कोई भी सूचना नहीं है l आरोपित अपराधों की निर्धारित अधिकतम सजा में से आधी से अधिक सजा काट चुके विचाराधीन कैदियों की संख्या की सूचना शासन और जेल मुख्यालय में नहीं होने की बात भी संजय को बताई गई है l समाजसेवी संजय शर्मा ने इस आरटीआई जबाब के आधार पर जेल महकमे पर कैदियों के मानवाधिकारों के प्रति उदासीन रुख अपनाने का गंभीर आरोप लगाया है l संजय कहते हैं कि एक तरफ जहाँ देश और राज्य की सरकारें किन्नरों को उनकी पहचान दिलाने की पुरजोर शिफारिश कर रही हैं वहीं यूपी के जेल महकमे के अधिकारी सरकारों के इन मंसूबों पर पानी फेरते नज़र आ रहे हैं l दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 436A का हवाला देते हुए मानवाधिकार मामलों के विशेषज्ञ संजय शर्मा कहते हैं कि जब जेल महकमे को ही नहीं पता कि कितने कैदी इस धारा के तहत बिना जमानत या बांड के जेलों से छोड़े जाने योग्य हो गए हैं तो ऐसे में यूपी में मानवाधिकार के संरक्षण की बात करना पूरी तरह से बेमानी है l गौरतलब है कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 436A के अनुसार आरोपित अपराधों की निर्धारित अधिकतम सजा में से आधी से अधिक सजा काट चुके विचाराधीन कैदियों को न्यायालय द्वारा बिना किसी जमानत या बांड के ही रिहा किये जाने की व्यवस्था की गई है l जेलों में कैदियों को दी जाने वाली सरकारी सुविधाओं की गुणवत्ता के पर्यवेक्षण के लिए राज्य सरकार की प्रचलित नीति की कोई भी सूचना नहीं दिए जाने से सूबे की सरकार का कैदियों के अधिकारों के प्रति उदासीन रवैया सामने आने की बात भी संजय ने कही है l अलबत्ता डा. शरद ने संजय को यह जरूर बताया है कि इस वित्तीय वर्ष में यूपी की सभी 70 जेलों में सीसीटीवी की स्थापना कर सुरक्षा को सुद्रण करने का कार्य पूर्ण हो जायेगा l इनमें से 23 कारागारों में वित्तीय वर्ष 2014-15 में, 20 कारागारों में वित्तीय वर्ष 2015-16 में और 20 कारागारों में वित्तीय वर्ष 2016-17 में सीसीटीवी कैमरे लगवाने के लिए वित्तीय स्वीकृतियां दीं गईं थीं l 05 कारागारों में निर्माण के समय ही सीसीटीवी कैमरों की इकाइयां लगाने और अवशेष 2 कारागारों में वर्तमान वित्तीय वर्ष में स्वीकृति प्रक्रियाधीन होने की बात भी शरद ने संजय को बताई है l कैदियों की पूरी जानकारियां न रखने को मानवाधिकार हनन का गंभीर कारक बताते हुए मानवाधिकार मामलों के विशेषज्ञ संजय शर्मा ने शासन और जेल प्रशासन को जेलों का अद्यतन डाटा रखकर मानवीय बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाने के लिए योगी आदित्यनाथ को अपंजीकृत सामाजिक संगठन ‘तहरीर’ की ओर से पत्र लिखने की बात इस स्वतंत्र पत्रकार से की गई एक एक्सक्लूसिव वार्ता में कही है l ------------------------------------------------------------------------------------------------ News written by freelance journalist Urvashi Sharma Exclusive News by YAISHWARYAJ ©yaishwaryaj